मैं रुपया हूँ - पाण्डेय बेचन शर्मा उग्र

Happy New Year Folks !!

Before I put up other blog posts on how my past year was and other controversies - I thought I'd do my readers a favor.

Presenting below, one of my most favorite pieces of prose.

Fortunately or Unfortunately I did not study this piece in my academic career. My sister did. However when I heard her recite it the first time itself, I knew that this piece was something to be reckoned with. That textbook got dusty and was later thrown away, but as usual, yours truly, truly (er excuse me !) and exceptionally made a hand written copy of that piece. Thanks to Google Transliteration - Here goes the Hindi Version of this Magnum Opus by Paandeya Bechan Sharma Ugra.

मैं रुपया हूँ - पाण्डेय बेचन शर्मा उग्र


मैं लड़कों के लड़कपन का खिलौना हूँ, मिठाई हूँ|
मैं जवानों की जवानी की जान हूँ, मस्ती हूँ|
मैं बूढों की बुढोथी की लकड़ी हूँ, सहारा हूँ, मैं रुपया हूँ|

मनुष्य मेरा ग़ुलाम है| मैं उसे हज़ार नाच नचा सकता हूँ, नचा चुका हूँ, नचा रहा हूँ|
दुनिया मुझसे दबती है| मैं उसे उलट सकता हूँ, उलट चुका हूँ, उलट रहा हूँ|
प्रकृति मेरी वशवर्तिनी है| मैं उसे बनता हूँ, बिगाड़ता हूँ, तोड़ता हूँ, मोड़ता हूँ, मैं रुपया हूँ|

इस विशाल विश्व में अगर कोई इश्वर हो तो मैं हूँ,
धर्म हो तो मैं हूँ,
मैं सत्य हूँ, मैं शिव हूँ, मैं सुन्दर हूँ
मैं सत हूँ, मैं चित हूँ, मैं आनंद हूँ
परलोक मैं हूँ, लोक मैं हूँ, हर्ष मैं हूँ, शोक मैं हूँ, क्षमा मैं हूँ मैं रुपया हूँ|

मेरी झनझनाहट में जो अलौकिक मधुरिमा है,
वह वीनापाणी की वीणा में कहाँ ?
भगवन लक्ष्मीपति के पाञ्चजन्य में कहाँ ?
कोकिल कल काकली में कहाँ ?
कामिनी के कोमल कंठ में कहाँ ?
मुरलीधर की सुरली में कहाँ ?
डमरूवाले के डमरू में कहाँ ?
मृदंग मुरचंग में कहाँ ?
सितार जल तरंग में कहाँ ?
यहाँ कहाँ , वहाँ कहाँ ?
मैं सप्त स्वरों के ऊपर अष्टम स्वर हूँ, परम मधुर हूँ, मैं रुपया हूँ|

गीता के गायकों,
चंडी सप्तशती के पाठकों,
भागवत के भक्तों,
सत्यनारायण कथा के प्रेमियों,
रामायण के अनुरागियों,
महाभारत को मानने वालों,
मेरा गीत गाओ, मेरा पाठ पढो, मेरे भक्त बनो, मेरी कथा सुनो, मुझसे अनुराग करो, मुझे मानो, मेरी शरण में आओ, तारण तरन मैं हूँ,
भव भयहरण मैं हूँ,
अशरण शरण मैं हूँ,
जन दुखहरण मैं हूँ,
धवल वरण मैं हूँ,
मंगल करण मैं हूँ,
पुन्याचरण मैं हूँ,
मैं रुपया हूँ|

मुझको आँख दिखाकर, मुझे ठुकराकर , मुझसे विद्रोह कर कोई बच सकता है ? कोई नहीं|
ज़मीनदार मैं हूँ, बादशाह मैं हूँ, बादशाहों का बादशाह मैं हूँ, मैं रुपया हूँ|

लंका सीता की रुष्टि तुष्टि से नहीं, मेरी रुष्टि तुष्टि से जली थी| मैं विभीषण पर प्रसन्न था |
कौरव द्रौपदी के कोप से नहीं, मेरे कोप से नष्ट हुए थे |मैं पांडवों पर प्रसन्न था |
जर्मनी , अमेरिका या ब्रिटिश की चालाकी से नहीं, मेरी धूर्तता से पराजित हुआ|ब्रिटेन पर में प्रसन्न था |

ठाकुरजी बोलते नहीं, मैं बोलता हूँ|
उनसे बड़ा हूँ|
ठाकुरजी चलते नहीं, मैं चलता हूँ|
उनसे मेरी अधिक साख है|
देवताओं में वह आकर्षण नहीं, जो मुझमें है|
ईश्वर में वह तेज नहीं, वह शक्ति नहीं है जो मुझमें है|
यह युग तर्क का है , उदाहरण का है, प्रत्यक्ष का है, स्वयंप्रभुता का है|
मैं प्रत्यक्ष हूँ, सदयः फल का दानी हूँ, स्वयं प्रभु हूँ, ईश्वर से बड़ा हूँ, मैं रुपया हूँ|

मुझसे वरदान लेकर पाप करो, तुम देवताओं से पूजे जाओगे| मुझसे वरदान लेकर एक दो नहीं सात खून करो, साफ़ बच जाओगे|साम्राज्य को साम्राज्य से भिड़ा दो|मनुष्य की बढ़ी हुई खेती को बेरहमी से कटवा डालो, जलवा डालो|संसार को विधवाओं, बच्चों, बूढों और अपाहिजों की हाय से भर दो|भूकंप उठा दो, मगर मुझसे वरदान लेकर, मैं सर्वशक्तिमान हूँ|

सर्वधर्मान परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज

सब धर्मों को छोड़कर, मेरी ही शरण में आ जाओ - क्योंकि मैं रुपया हूँ|




Sunday, January 1, 2012 by Hari
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